किताबों की शिफ्टिंग या रद्दी का खेल? हेडमास्टर के बेटे के साथ पकड़ी गई सरकारी पुस्तकों की खेप

जौरा। मध्य प्रदेश सरकार जहां सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जौरा में सरकारी पुस्तकों के दुरुपयोग का एक मामला सामने आया है। यहां शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-3 से बड़ी मात्रा में सरकारी किताबें ई-रिक्शा में भरकर ले जाई जा रही थीं, जिन्हें बीच रास्ते में शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने पकड़ लिया। मामले में विद्यालय की हेडमास्टर पर सवाल खड़े हो गए हैं, जबकि विभागीय जांच की तैयारी की जा रही है। जानकारी के अनुसार, खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) राजीव जादौन को बुधवार दोपहर सूचना मिली कि शासकीय माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-3 के स्टोर रूम से सरकारी किताबें निकालकर ई-रिक्शा में भरकर कहीं ले जाई जा रही हैं। सूचना मिलते ही उन्होंने पुस्तक प्रभारी एवं सहायक खंड शिक्षा अधिकारी (बीएसी) रोहित श्रीवास को मौके पर कार्रवाई के लिए भेजा। बीएसी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जनपद पंचायत के सामने ई-रिक्शा को रोक लिया। वाहन में चालक सहित दो युवक सवार थे। पूछताछ और जांच के दौरान ई-रिक्शा में बड़ी संख्या में कक्षा 1 से 8 तक की सरकारी पाठ्यपुस्तकों के बंडल पाए गए। अधिकारियों ने किताबों को वापस विद्यालय पहुंचवाकर स्टोर रूम में रखवाया।

खंड शिक्षा अधिकारी राजीव जादौन ने बताया कि बरामद पुस्तकों का वजन करीब दो क्विंटल के आसपास है। पूछताछ में दोनों युवकों ने बताया कि वे हेडमास्टर मंजू शाक्य के कहने पर किताबें ले जा रहे थे। इनमें से एक युवक हेडमास्टर का पुत्र बताया जा रहा है। अधिकारियों ने यह भी सवाल उठाया कि स्टोर रूम की चाबी उनके पास कैसे पहुंची। बीईओ ने बताया कि मामले की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) को दे दी गई है तथा हेडमास्टर के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा जाएगा।

जिला शिक्षा अधिकारी भगवान सिंह इंदोलिया ने अलग पक्ष रखते हुए कहा कि किताबें बेचने के लिए नहीं ले जाई जा रही थीं, बल्कि जगह की कमी के कारण उन्हें पास के प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट किया जा रहा था। उनके अनुसार, माध्यमिक विद्यालय में पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण हेडमास्टर ने अपने बेटे की मदद से पुस्तकों को दूसरे विद्यालय में भिजवाने की व्यवस्था की थी।हालांकि, बीईओ और बीएसी की कार्रवाई तथा स्थानीय स्तर पर मिली सूचना के बाद मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। अब विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि किताबें वास्तव में शिफ्टिंग के लिए ले जाई जा रही थीं या उन्हें रद्दी में बेचने की तैयारी थी।

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