मुरैना के जौरा क्षेत्र के परसोटा गांव में मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान लाइसेंसी बंदूकों से की गई फायरिंग अब गंभीर सवालों के घेरे में है। फायरिंग के दौरान चली एक गोली दूसरी तरफ स्थित बलालपुरा गांव में किसान की भैंस को जा लगी। घायल भैंस की इलाज के दौरान अगले दिन मौत हो गई। घटना से किसान परिवार में आक्रोश है। परिवार का कहना है कि जिस जगह गोली लगी, वहां महिला और बच्चे भी मौजूद थे। अगर गोली भैंस की जगह किसी महिला या बच्चे को लग जाती तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?
डेढ़ लाख रुपये की थी भैंस
निरार थाना क्षेत्र के बलालपुरा निवासी 55 वर्षीय किसान सियाराम पुत्र भागीरथ कुशवाह की भैंस 29 अगस्त को परसोटा गांव में आयोजित मटकी फोड़ प्रतियोगिता के दौरान चली गोली से घायल हो गई। भैंस की गर्दन के नीचे गोली लगी थी। इलाज के दौरान 30 अगस्त को उसकी मौत हो गई। किसान के मुताबिक भैंस की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये थी। सोमवार को उसका पोस्टमार्टम कराया गया।

परिवार के सामने चलीं गोलियां
सियाराम की बेटी माधुरी कुशवाह ने बताया कि शनिवार शाम करीब 4 से 5 बजे परिवार के लोग घर के बाहर बैठे थे और बच्चे खेल रहे थे। इसी दौरान परसोटा की ओर से लगातार गोलियां चलने की आवाजें आईं। कुछ देर बाद बाहर बंधी भैंस के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। पास जाकर देखा तो भैंस घायल हालत में कांप रही थी और उसके शरीर में गोली लगी थी। परिजनों ने पुलिस और डॉक्टर को सूचना दी। इलाज शुरू हुआ, लेकिन अगले दिन भैंस की मौत हो गई।
पुलिस जांच में जुटी
निरार थाना प्रभारी एसआई रामकुमार गौतम के अनुसार प्रतियोगिता के दौरान काफी संख्या में लोग मौजूद थे और कई गोलियां चली थीं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। गोली की स्थिति और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों को डॉक्टर की रिपोर्ट व पीएम रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट किया जाएगा। साक्ष्यों की जांच के बाद अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बंदूकों के प्रदर्शन पर उठे सवाल
मटकी फोड़ प्रतियोगिता में फायरिंग को लेकर पहले से ही जौरा पुलिस जांच कर रही है। अब भैंस की मौत का मामला सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि परंपरा के नाम पर खुले में इस तरह फायरिंग करना आखिर कितना सुरक्षित है। किसान परिवार का कहना है कि इस बार गोली पशु को लगी है, लेकिन अगर यही गोली किसी इंसान या खेल रहे बच्चे को लग जाती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी।