मुरैना। चंबल नदी में डॉल्फिन की आबादी और उनके प्राकृतिक आवास की स्थिति का आकलन करने के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान, देहरादून की 22 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम वैज्ञानिक सर्वे में जुटी है। आधुनिक उपकरणों की मदद से किए जा रहे इस सर्वे में डॉल्फिन की मौजूदगी, उनकी आबादी में बदलाव और प्रजनन से जुड़े पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, चंबल के डाउनस्ट्रीम क्षेत्र में राजघाट से भिंड तक डॉल्फिन की प्रजनन गतिविधियों में वृद्धि के संकेत मिले हैं। हालांकि, इन संकेतों की पुष्टि सर्वे के अंतिम आंकड़ों से होगी।

7 अक्टूबर से शुरू हुआ सर्वे, पचनदा तक पहुंची टीम
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. विनीथ सिंह के नेतृत्व में 22 सदस्यीय टीम ने 7 अक्टूबर को रेंज वाइड रिवर डॉल्फिन सर्वे के तहत चंबल नदी में डांग बसई से अभियान की शुरुआत की। टीम नदी के विभिन्न हिस्सों का अध्ययन करते हुए पचनदा तक पहुंची है। प्रोजेक्ट-2 के तहत चल रहे इस सर्वे का उद्देश्य डॉल्फिन की संख्या का आकलन करने के साथ उनके प्राकृतिक आवास और पर्यावरणीय परिस्थितियों से जुड़ा वैज्ञानिक डेटा जुटाना है।

F-PODs और A-tags से पानी के भीतर डॉल्फिन की तलाश
सर्वे में डॉल्फिन की मौजूदगी का पता लगाने के लिए F-PODs और A-tags जैसे आधुनिक उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है। पानी के भीतर डॉल्फिन की गतिविधियों से जुड़े ध्वनि संकेतों का अध्ययन कर उनकी उपस्थिति का पता लगाने में मदद ली जा रही है। इसके अलावा GPS, लेजर रेंजफाइंडर और दूरबीन की सहायता से भी डॉल्फिन की गतिविधियों और उनके आवास का निरीक्षण किया जा रहा है।
पानी की गुणवत्ता और नदी की गहराई का भी अध्ययन
विशेषज्ञ टीम का सर्वे केवल डॉल्फिन की गिनती तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिक यह भी समझने का प्रयास कर रहे हैं कि चंबल नदी की मौजूदा परिस्थितियां डॉल्फिन के जीवन और प्रजनन के लिए कितनी अनुकूल हैं। इसके लिए पानी की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। वहीं, चार्ट प्लॉटर और डेप्थ साउंडर की मदद से नदी की गहराई, प्रवाह मार्ग और संरचना से संबंधित जानकारियां एकत्रित की जा रही हैं। इन आंकड़ों के आधार पर डॉल्फिन के प्राकृतिक आवास की स्थिति का आकलन करने और भविष्य में उनके संरक्षण के लिए बेहतर रणनीति तैयार करने में मदद मिल सकती है।

वर्ष 2022 के सर्वे में दर्ज हुई थीं 243 डॉल्फिन
वन विभाग के अनुसार, रेंज वाइड रिवर डॉल्फिन सर्वे प्रत्येक चार वर्ष में किया जाता है। चंबल नदी में वर्ष 2022 में हुए पहले सर्वे के दौरान कुल 243 डॉल्फिन दर्ज की गई थीं। अब नए सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि पिछले चार वर्षों में इनकी आबादी में कितना बदलाव आया है और नदी के किन क्षेत्रों में इनकी मौजूदगी अधिक है। गंगा नदी डॉल्फिन का प्रमुख प्राकृतिक आवास है। इसके अलावा गंगा की सहायक नदियों यमुना और चंबल में भी डॉल्फिन पाई जाती हैं। चंबल में इनकी मौजूदगी नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

चंबल के बाद यमुना में भी शुरू हुआ सर्वे
चंबल नदी में सर्वे के बाद अब यमुना नदी में भी डॉल्फिन की आबादी का आकलन किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, यमुना में 16 अक्टूबर से सर्वे शुरू हो चुका है। दोनों नदियों में किए जा रहे इस वैज्ञानिक अध्ययन से डॉल्फिन की आबादी, उनके प्राकृतिक आवास और संरक्षण की जरूरतों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
अंतिम सर्वे रिपोर्ट से स्पष्ट होगा कि चंबल में डॉल्फिन की कुल आबादी में कितनी वृद्धि या कमी हुई है और प्रजनन से जुड़े शुरुआती संकेतों की वास्तविक स्थिति क्या है।