मुरैना। चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन और रेत माफियाओं की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों ने निगरानी व्यवस्था और कार्रवाई की रणनीति पर मंथन किया। मुरैना के देवरी घड़ियाल केंद्र में आयोजित सीईसी की समीक्षा बैठक में तीन राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में चंबल घड़ियाल अभयारण्य के प्रतिबंधित क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत करने और आधुनिक तकनीक के जरिए अवैध गतिविधियों पर नजर रखने पर जोर दिया गया।

सीईसी की बैठक में तीन राज्यों के अधिकारी शामिल
मासिक समीक्षा बैठक में शामिल होने के लिए सीईसी सदस्य सुनील लिमाये और पी. कथिरवेल मंगलवार को मुरैना पहुंचे। देवरी घड़ियाल केंद्र में आयोजित बैठक में सीसीएफ भरतपुर ललित भारती, ग्वालियर के सीएफ, मुरैना कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़, भिंड और धौलपुर के कलेक्टर, मुरैना एसपी धर्मराज मीना, भिंड और धौलपुर के एसपी, मुरैना डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल तथा आगरा और धौलपुर के डीएफओ सहित खनिज और परिवहन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में चंबल नदी के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन रोकने, संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाने और संबंधित विभागों के बीच समन्वय के साथ कार्रवाई करने की तैयारियों की समीक्षा की गई।

18 पॉइंट पर 36 CCTV कैमरों से निगरानी
समीक्षा बैठक के दौरान मुरैना डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल ने वन विभाग की गतिविधियों और निगरानी व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि चंबल घड़ियाल अभयारण्य के प्रतिबंधित क्षेत्र पर नजर रखने के लिए 18 स्थानों पर 36 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं।इन कैमरों के माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसका उद्देश्य प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की पहचान करना और समय रहते संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाना है।
₹1.25 करोड़ की लागत से लगा AI सर्विलांस सिस्टम
अवैध रेत उत्खनन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए रिठौरा में करीब 1.25 करोड़ रुपये की लागत से एआई आधारित सर्विलांस सिस्टम स्थापित किया गया है। इस सिस्टम के जरिए आसपास के लगभग पांच किलोमीटर क्षेत्र की निगरानी किए जाने की जानकारी दी गई।बताया गया कि प्रतिबंधित क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधि या अनधिकृत प्रवेश होने पर सिस्टम सायरन के माध्यम से अलर्ट दे सकता है। इसके साथ ही संबंधित स्थान की लोकेशन मिलने से अधिकारियों को मौके तक पहुंचने और कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।
अलर्ट मिलते ही मौके पर पहुंच सकेगी टीम
एआई सर्विलांस सिस्टम का प्रमुख उद्देश्य संदिग्ध गतिविधियों की सूचना समय पर उपलब्ध कराना है, ताकि संबंधित विभागों की टीमें तत्काल कार्रवाई कर सकें। इससे अवैध रेत उत्खनन में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है। मुरैना के साथ राजस्थान की सीमा से लगे संवेदनशील क्षेत्रों में भी निगरानी मजबूत करने की योजना है। हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अलर्ट मिलने के बाद कार्रवाई कितनी तेजी से होती है और कितने मामलों में अवैध उत्खनन को रोका जा पाता है।
घड़ियाल संरक्षण के लिए अहम है चंबल की सुरक्षा
चंबल नदी घड़ियालों और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन से नदी के प्राकृतिक आवास और जलीय पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। ऐसे में तीन राज्यों के अधिकारियों की संयुक्त समीक्षा बैठक और तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि 36 सीसीटीवी कैमरों और करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित एआई सर्विलांस सिस्टम के जरिए अवैध रेत उत्खनन पर कितनी प्रभावी रोक लगती है और रेत माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई में कितना सुधार आता है।