भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव को लेकर लगाए गए भूमि संबंधी आरोपों पर सियासी घमासान मचा हुआ है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर लगाए गए कथित भूमि घोटाले के आरोपों को भारतीय जनता पार्टी ने पूरी तरह निराधार, तथ्यहीन और राजनीतिक साजिश करार दिया है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस मुख्यमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता और प्रदेश में मजबूत होती उनकी राजनीतिक पकड़ से परेशान होकर झूठे आरोपों के सहारे उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास कर रही है। बुधवार को आयोजित एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दस्तावेजों के साथ कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह गलत और भ्रामक हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा इन आरोपों का पूरी मजबूती से खंडन करती है और जनता को भ्रमित करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने देगी।
चुनावी हलफनामे से मेल खाती है जमीन की जानकारी
भाजपा ने दावा किया कि डॉ. मोहन यादव ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान अपने नामांकन पत्र में जो 17 एकड़ भूमि घोषित की थी, उसमें आज तक एक इंच का भी बदलाव नहीं हुआ है। इसी प्रकार उनकी पत्नी सीमा यादव के नाम दर्ज 12.29 एकड़ भूमि में भी कोई वृद्धि या परिवर्तन नहीं हुआ है। खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस जिन तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत कर रही है, वे सरकारी रिकॉर्ड और दस्तावेजों से मेल नहीं खाते। उन्होंने कहा कि यदि आरोपों में सच्चाई होती तो भूमि के रिकॉर्ड में उसका स्पष्ट उल्लेख दिखाई देता, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है।
कंपनी को लेकर भी आरोपों की निकली हवा

प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा ने कांग्रेस द्वारा उठाए गए कंपनी संबंधी मुद्दे पर भी सफाई दी। भाजपा के अनुसार, जिस कंपनी का नाम लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं, उससे डॉ. मोहन यादव वर्ष 2017 में ही निदेशक पद से इस्तीफा दे चुके थे। पार्टी ने कहा कि कंपनी के पास वर्ष 2023 में लगभग 68 एकड़ भूमि थी, जो वर्तमान में घटकर 65 एकड़ रह गई है। भाजपा का तर्क है कि जब मुख्यमंत्री कई वर्ष पहले ही कंपनी के प्रबंधन से अलग हो चुके हैं, तब कंपनी की जमीन या उसके लेन-देन को मुख्यमंत्री से जोड़ना पूरी तरह अनुचित और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है।
पुत्र और पुत्रवधू की जमीन को लेकर भी दी सफाई
भाजपा ने मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव और पुत्रवधू शालिनी यादव से जुड़े आरोपों पर भी विस्तार से जवाब दिया। पार्टी के अनुसार, वैभव यादव के नाम लगभग 16 एकड़ भूमि दर्ज है, जिसमें मुख्यमंत्री बनने के बाद कोई बदलाव नहीं हुआ है।वहीं, पुत्रवधू शालिनी यादव द्वारा खरीदी गई लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि को लेकर भाजपा ने स्पष्ट किया कि यह भूमि मास्टर प्लान क्षेत्र से बाहर स्थित है। ऐसे में भूमि खरीद को किसी प्रकार के प्रभाव या पद के दुरुपयोग से जोड़ना पूरी तरह गलत है।
रिश्तेदारों की संपत्ति को मुख्यमंत्री से जोड़ना गलत
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री के कुछ रिश्तेदारों की संपत्तियों और व्यवसायों को भी कांग्रेस द्वारा विवाद में घसीटा जा रहा है, जबकि उनका मुख्यमंत्री या उनके परिवार से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्वतंत्र व्यवसाय और आर्थिक गतिविधियों के लिए स्वतंत्र है और किसी रिश्तेदार की संपत्ति को मुख्यमंत्री की संपत्ति बताना जनता को गुमराह करने का प्रयास है।
लोकप्रियता से घबराई कांग्रेस: भाजपा

भाजपा नेताओं का कहना है कि डॉ. मोहन यादव का राजनीतिक कद लगातार बढ़ रहा है और पिछड़े वर्ग सहित विभिन्न वर्गों में उनकी स्वीकार्यता मजबूत हुई है। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वह व्यक्तिगत आरोपों और छवि धूमिल करने की राजनीति का सहारा ले रहा है।भाजपा का दावा है कि दस्तावेजों के सामने आने के बाद कांग्रेस के आरोपों की सच्चाई जनता के सामने आ चुकी है। पार्टी का कहना है कि झूठे आरोपों के कारण कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि मुख्यमंत्री मोहन यादव के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत होगा।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में इस मुद्दे को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है, लेकिन फिलहाल भाजपा इसे कांग्रेस की असफल राजनीतिक रणनीति और मुख्यमंत्री की छवि खराब करने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत कर रही है।