मुरैना। जिले में समर्थन मूल्य पर गेहूं उपार्जन के लिए किए गए किसान पंजीयन में अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने बड़ी कार्रवाई की है। पंजीयन प्रक्रिया में गड़बड़ी पाए जाने पर 10 प्राथमिक सहकारी समितियों के समिति प्रबंधकों और ऑपरेटरों के विरुद्ध बामोर, मुरैना एवं जौरा थानों में एफआईआर दर्ज कराई गई है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन द्वारा जिन समितियों के प्रबंधकों और ऑपरेटरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है, उनमें प्राथमिक सहकारी समिति चेना, गलेथा, भेंसरोली, जरेरुआ, जैतपुर-नूराबाद, परसोंटा, उत्तमपुरा, निटेहरा, सुमावली और खनेता शामिल हैं। इन समितियों के संबंधित प्रबंधकों एवं ऑपरेटरों पर किसान पंजीयन में अनियमितता और नियमों के उल्लंघन के आरोप पाए गए हैं। कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने कहा कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजीयन प्रक्रिया की लगातार निगरानी की जा रही है और यदि किसी भी स्तर पर फर्जीवाड़ा या अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी किसान पंजीयन के सत्यापन में लापरवाही और अनियमितता पाए जाने पर संबंधित तहसीलदारों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रारंभ की जा चुकी है। इसके अलावा 15 पटवारियों के खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।कलेक्टर ने जानकारी दी कि जिले में गेहूं विक्रय के लिए पंजीकृत कुल 5,730 किसानों में से केवल 68 किसान गैर-भूमिस्वामी हैं, जो कुल पंजीकृत किसानों का लगभग एक प्रतिशत हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति के अनुरूप जिला प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ केवल वास्तविक भूमिस्वामी किसानों को ही मिले। उन्होंने कहा कि किसानों के अधिकारों की रक्षा, उपार्जन व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने और किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए प्रशासन पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। यदि भविष्य में भी किसी स्तर पर अनियमितता या फर्जीवाड़ा पाया जाता है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।


