मुरैना में बीजेपी बनाम बीजेपी! कांग्रेस के साथ आए 4 भाजपा पार्षद, महापौर के खिलाफ खुली बगावत

मुरैना। नगर निगम मुरैना की राजनीति में बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। शहर के विकास कार्यों पर चर्चा के लिए नेता प्रतिपक्ष द्वारा सभापति को पत्र लिखकर अभियाचित सम्मेलन बुलाने की मांग की गई थी। सभापति ने इस मांग को स्वीकार करते हुए 7 अगस्त को सम्मेलन बुलाने की अनुमति दे दी है। इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी बात यह रही कि कांग्रेस पार्षदों के साथ भाजपा के चार पार्षदों ने भी पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिससे भाजपा की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है।

नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि महापौर द्वारा पिछले करीब पांच महीनों से पार्षद सम्मेलन नहीं बुलाया गया, जिसके चलते शहर के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस पत्र पर कांग्रेस पार्षदों के साथ भाजपा पार्षद शशी कुशवाह, दिनेश तोमर, प्रेमवती रमेश और हरिओम राठौर के भी हस्ताक्षर हैं।

बताया जा रहा है कि ये चारों पार्षद एमआईसी (मेयर-इन-काउंसिल) के सदस्य भी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विपक्ष के साथ भाजपा पार्षदों का खड़ा होना नगर निगम की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, महापौर क्रिकेट टूर्नामेंट को लेकर पहले से ही महापौर शारदा सोलंकी और कुछ भाजपा पार्षदों के बीच नाराजगी बनी हुई थी।

सूत्रों का यह भी कहना है कि पार्टी स्तर पर मतभेद दूर कराने की कोशिशें हुईं, लेकिन अब कांग्रेस के समर्थन में भाजपा पार्षदों के खुलकर आने से पार्टी में गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इधर, महापौर शारदा सोलंकी का स्वास्थ्य खराब होने के बाद उन्हें उपचार के लिए दिल्ली ले जाया गया है। ऐसे में नगर निगम की राजनीति आने वाले दिनों में और गरमाने के संकेत मिल रहे हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि भाजपा संगठन इन पार्षदों के कदम को पार्टी अनुशासन के विरुद्ध मानता है, तो संबंधित पार्षदों से स्पष्टीकरण मांगने सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि, इस संबंध में भाजपा संगठन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई सामने नहीं आई है।”

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा का पक्ष जानने के लिए जिला अध्यक्ष कमलेश कुशवाहा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।

अब सभी की निगाहें 7 अगस्त को होने वाले अभियाचित सम्मेलन पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बैठक शहर के विकास के मुद्दों पर केंद्रित रहती है या फिर मुरैना की राजनीति में नए सियासी समीकरणों की शुरुआत करती है।

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