मध्यप्रदेश शिक्षक संघ का प्रदर्शन, टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की उठी मांग

मुरैना। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में गुरुवार को मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के बैनर तले जिलेभर के सैकड़ों शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और शिक्षामंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन मजिस्ट्रेट को सौंपा तथा टीईटी की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करने की मांग की।प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए टीईटी की कोई अनिवार्यता नहीं थी। ऐसे में राइट टू एजुकेशन (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम थोपना पूरी तरह अनुचित है। उनका कहना था कि वे वर्षों से विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं, इसलिए अब उनसे दोबारा पात्रता परीक्षा की अपेक्षा करना उनके अनुभव और सेवाओं का अपमान है।शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 के बाद बनाए गए प्रावधानों के जरिए पुराने शिक्षकों को भी टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। उन्होंने इसे शिक्षकों के हितों के खिलाफ “काला कानून” बताते हुए सरकार से तत्काल इस व्यवस्था को वापस लेने की मांग की।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में भी विरोध हो रहा है और कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए शिक्षकों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उनका कहना था कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों की नौकरी और सम्मान से जुड़े इस विषय पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना आवश्यक है।शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर शिक्षक सड़क से लेकर संसद तक अपनी आवाज बुलंद करेंगे और अपने अधिकारों की लड़ाई को और तेज करेंगे।प्रदर्शन में शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष पवन सिंह परिहार, जिला सचिव रामअवतार सिंह सहित जिलेभर के बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे। आंदोलन के दौरान शिक्षकों में सरकार के निर्णय के प्रति गहरा आक्रोश देखने को मिला।

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