मुरैना। दुष्कर्म के आरोप में करीब पांच महीने से जेल में बंद मुरैना के तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर अरविंद माहौर को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर कर दी है। निचली अदालत से जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
जानकारी के अनुसार, अरविंद माहौर मुरैना में डिप्टी कलेक्टर के पद पर पदस्थ थे। एक 32 वर्षीय युवती की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने उनके खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें मुरैना सब जेल भेजा गया था। करीब डेढ़ महीने बाद उन्हें ग्वालियर सेंट्रल जेल स्थानांतरित कर दिया गया था।
फेसबुक पर दोस्ती, शादी का झांसा देने का आरोप
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, मुरैना निवासी युवती ने 2 जून 2026 को सिविल लाइन थाने में शिकायत दी थी। युवती का आरोप था कि वर्ष 2025 में फेसबुक के जरिए उसकी तत्कालीन एसडीएम अरविंद माहौर से दोस्ती हुई थी। उस समय माहौर सबलगढ़ में एसडीएम के पद पर पदस्थ थे।
युवती ने आरोप लगाया था कि माहौर ने शादी का वादा कर उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। शिकायत में 30 जून 2025 की घटना का भी उल्लेख किया गया था। आरोप के मुताबिक, माहौर उसे घुमाने के बहाने सर्किट हाउस के पीछे ले गए थे, जहां उसके साथ दुष्कर्म किया।
सरकारी आवास और ग्वालियर के फ्लैट में भी दुष्कर्म का आरोप
शिकायत में युवती ने आरोप लगाया था कि सर्किट हाउस के अलावा अरविंद माहौर ने अपने सरकारी आवास और ग्वालियर स्थित एक फ्लैट में भी उसके साथ दुष्कर्म किया। युवती ने यह भी आरोप लगाया था कि शादी के बदले उससे 5 करोड़ रुपए की मांग की गई और एक महीने तक किसी दूसरे युवक के साथ रहने की शर्त रखी गई थी।
पांच महीने बाद जेल से बाहर आने का रास्ता साफ
मामले में गिरफ्तारी के बाद से अरविंद माहौर जेल में बंद थे। निचली अदालत से जमानत नहीं मिलने पर उन्होंने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में याचिका लगाई थी। अब हाई कोर्ट ने 50 हजार रुपए के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर कर ली है। इस आदेश के बाद उनके जेल से रिहा होने का रास्ता साफ हो गया है।