जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत बरहावली में मनाया गया बावड़ी उत्सव, जल संरक्षण का लिया संकल्प

मुरैना। मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत विकासखंड मुरैना में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में लगातार जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में ग्राम बरहावली स्थित चौवेश्वर महादेव मंदिर परिसर की प्राचीन बावड़ी पर ‘बावड़ी उत्सव’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संतों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नवांकुर संस्थाओं, प्रस्फुटन समितियों के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने जल संरक्षण का संदेश देते हुए प्राचीन जल संरचनाओं को सुरक्षित रखने का सामूहिक संकल्प लिया।

कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश जन अभियान परिषद चंबल संभाग के संभागीय समन्वयक धर्मेंद्र सिंह सिसोदिया एवं जिला समन्वयक सतीश सिंह तोमर के निर्देशन तथा विकासखंड समन्वयक अनिल मोदी के मार्गदर्शन में किया गया। उत्सव के दौरान पूज्य संत श्री हरिओम दास महाराज सहित अन्य संतों का माल्यार्पण कर सम्मान किया गया और पारंपरिक विधि-विधान से बावड़ी का जल पूजन किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने प्राचीन बावड़ी के घाट पर बैठकर जल संरक्षण के महत्व पर चर्चा की। साथ ही लोगों को यह संदेश दिया गया कि पानी की हर बूंद अनमोल है और पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद आवश्यक है।इस अवसर पर नवांकुर संस्था कावेरी शिक्षा सेवा जनकल्याण समिति के धर्मवीर सिंह तोमर, शिवम तोमर, मुरैना यूथ अकादमी के आकाश सेंगर, संकट मोचन प्रगति फाउंडेशन के विकास शर्मा, राधा माधव जनकल्याण एवं मानव उत्थान समिति के गिर्राज शर्मा, चंबल युवा जनकल्याण समिति के पदाधिकारी, प्रस्फुटन समितियों के सदस्य, मेंटर तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान बावड़ी परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया गया। सभी प्रतिभागियों ने श्रमदान कर बावड़ी और उसके आसपास की सफाई की तथा पोस्टर और बैनरों के माध्यम से जल संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण का संदेश आमजन तक पहुंचाया। साथ ही लोगों को प्राचीन बावड़ियों, कुओं और अन्य जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई एवं संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।

विकासखंड समन्वयक अनिल मोदी ने कहा कि बावड़ियां और पारंपरिक कुएं हमारी सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक धरोहर हैं। जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य इन उपेक्षित और दम तोड़ते जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर जल संकट के प्रति समाज को जागरूक करना है। जनभागीदारी से ही जल संरक्षण का यह अभियान सफल होगा।

कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थित लोगों ने जल स्रोतों को स्वच्छ बनाए रखने, प्राचीन जल संरचनाओं का संरक्षण करने तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया। यह आयोजन जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने और समाज को अपनी पारंपरिक जल विरासत से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

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