GroundReport: मुरैना। मध्य प्रदेश सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने के दावे करती है, लेकिन मुरैना जिले से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
जनपद पंचायत मुरैना के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत नावली बड़ागांव के ग्राम गड़ुआ का पुरा में आज भी श्मशान घाट तक जाने के लिए पक्का रास्ता नहीं है।

बरसात के मौसम में पूरा मार्ग कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे ग्रामीणों को अंतिम संस्कार तक में भारी परेशानी उठानी पड़ती है।मंगलवार रात गांव निवासी सुल्तान जाटव के पिता का निधन हो गया। जब परिजन और ग्रामीण अंतिम संस्कार के लिए अर्थी लेकर श्मशान घाट पहुंचे, तो उन्हें मजबूरी में दलदल और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ा।

फिसलन भरे रास्ते पर लोगों ने बेहद मुश्किल हालात में अंतिम यात्रा पूरी की।ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट तक सड़क निर्माण की मांग कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से की गई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि विकास के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि जमीनी स्तर पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कम से कम श्मशान घाट तक पक्का रास्ता बनाया जाए, ताकि अंतिम यात्रा के दौरान लोगों को ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर ग्रामीणों को जीवन के साथ-साथ मृत्यु के बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए कब तक संघर्ष करना पड़ेगा?