मुरैना। एमएस रोड स्थित पुराने बस स्टैंड के सामने संचालित शासकीय जिला पशु अस्पताल की जमीन को लेकर नगर निगम और अस्पताल प्रबंधन के बीच विवाद सामने आया है। अस्पताल प्रबंधन का आरोप है कि नगर सुधार के लिए छोड़ी गई जमीन पर नगर निगम द्वारा स्थायी दुकानों का निर्माण कराया जा रहा है। इसे लेकर अस्पताल के डिप्टी डायरेक्टर ने जिला कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर निर्माण कार्य तत्काल रुकवाने की मांग की है।

जानकारी के मुताबिक, मुरैना को जिला बनाए जाने के बाद आगरा निवासी व्यवसायी चंद्रभान गुप्ता ने पशु अस्पताल के निर्माण के लिए जमीन दान में दी थी। इसी जमीन पर वर्तमान में शासकीय जिला पशु अस्पताल संचालित हो रहा है।अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, वर्ष 2016 में तत्कालीन कलेक्टर विनोद शर्मा ने नगर सुधार के उद्देश्य से अस्पताल प्रबंधन से करीब 1700 वर्गफीट जमीन मांगी थी। कलेक्टर के निर्देश पर अस्पताल प्रबंधन ने एमएस रोड की तरफ से करीब 12 फीट जगह छोड़कर बाउंड्रीवाल कर दी थी, ताकि भविष्य में नगर सुधार संबंधी कार्य किया जा सके।अब इसी जमीन पर स्थायी दुकानों के निर्माण की तैयारी का आरोप है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि नगर सुधार के लिए छोड़ी गई जगह का उपयोग यदि स्थायी दुकानों के लिए किया जाता है तो अस्पताल की व्यवस्थाएं प्रभावित होंगी।

पार्किंग और डायल 1962 की गाड़ियों को लेकर चिंता
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, प्रस्तावित दुकानों के निर्माण के बाद अस्पताल में वाहनों की पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह नहीं बचेगी। पशुपालन एवं चिकित्सा विभाग की डायल-1962 सेवा की गाड़ियों को खड़ा करने में भी परेशानी होगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों से अपने पशुओं का इलाज कराने आने वाले किसानों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पशुओं को अस्पताल परिसर में लाने वाले किसानों को अपने वाहन खड़े करने और पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त स्थान की जरूरत होती है। स्थायी निर्माण होने से यह व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।

अस्पताल अधीक्षक ने लगाया अतिक्रमण का आरोप
अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरपी शर्मा ने बताया कि पशु अस्पताल के निर्माण के लिए व्यवसायी चंद्रभान गुप्ता ने जमीन दान में दी थी। वर्ष 2016 में तत्कालीन कलेक्टर के निर्देश पर नगर सुधार के लिए एमएस रोड की ओर करीब 12 फीट जमीन छोड़कर बाउंड्रीवाल बनाई गई थी।डॉ. शर्मा का आरोप है कि अब नगर निगम इसी छोड़ी गई जगह पर स्थायी दुकानें बनाकर कब्जा करने की तैयारी कर रहा है। उन्होंने बताया कि मामले को लेकर कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को पत्र देकर निर्माण कार्य रुकवाने की मांग की गई है।

प्रशासन के फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में पहुंच चुका है। एक ओर नगर निगम की ओर से नगर सुधार और निर्माण कार्य की बात सामने आ रही है, वहीं पशु अस्पताल प्रबंधन इसे अस्पताल की व्यवस्थाओं के लिए गंभीर समस्या बता रहा है। अब सवाल यह है कि नगर सुधार के लिए छोड़ी गई जमीन पर स्थायी दुकानों का निर्माण किस आधार पर किया जा रहा है? यदि निर्माण होता है तो अस्पताल की पार्किंग, डायल-1962 वाहनों और पशुओं के इलाज के लिए आने वाले किसानों की सुविधाओं की वैकल्पिक व्यवस्था क्या होगी? शिकायत के बाद अब जिला प्रशासन की कार्रवाई और निर्माण को लेकर लिए जाने वाले निर्णय पर नजर है।