मुरैना। कैलारस जनपद के शासकीय प्राथमिक विद्यालय पोखर का पुरा में शिक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। करीब ₹65 हजार प्रतिमाह वेतन पाने वाले हेडमास्टर अमरलाल रावत पर स्कूल के बच्चों को पढ़ाने के लिए ₹4500 महीने पर प्राइवेट शिक्षिका रखने का आरोप लगा है। जिला शिक्षा अधिकारी बीएस इन्दोलिया के औचक निरीक्षण में मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया।डीईओ के निरीक्षण के दौरान विद्यालय में 16 बच्चे मौजूद मिले, लेकिन स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी सरकारी शिक्षक के बजाय प्राइवेट शिक्षिका प्रीति रावत संभाल रही थीं। वहीं हेडमास्टर अमरलाल रावत स्कूल में मौजूद नहीं मिले।

₹4500 महीने पर पढ़ा रही थी प्राइवेट शिक्षिका
डीईओ ने जब प्राइवेट शिक्षिका से पूछताछ की तो उसने बताया कि वह करीब एक महीने से स्कूल में बच्चों को पढ़ाने आ रही है और उसे इसके एवज में ₹4500 प्रतिमाह दिए जाते हैं। शिक्षिका के मुताबिक, उसे हेडमास्टर अमरलाल रावत ने बच्चों को पढ़ाने के लिए रखा था। शिक्षिका ने यह भी बताया कि हेडमास्टर एक दिन पहले स्कूल आए थे, हाजिरी लगाई और फिर चले गए। उसके दावे के मुताबिक, हेडमास्टर नियमित रूप से स्कूल में पढ़ाने नहीं आते थे और इससे पहले भी प्राइवेट शिक्षक बच्चों को पढ़ाने के लिए रखे जाते रहे हैं।

सरकारी स्कूल में प्राइवेट शिक्षक, उठे सवाल
मामला सामने आने के बाद सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति और शिक्षा व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी नियुक्त शिक्षकों की होती है। ऐसे में निरीक्षण के दौरान प्राइवेट शिक्षिका के बच्चों को पढ़ाने का मामला सामने आना गंभीर माना जा रहा है।

डीईओ ने जारी किया नोटिस
मामले के सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी बीएस इन्दोलिया ने हेडमास्टर अमरलाल रावत को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है। डीईओ के अनुसार, प्राइवेट शिक्षिका को रखकर बच्चों को पढ़वाना शासकीय नियमों के विपरीत है। मामले की रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी गई है। अधिकारी ने बताया कि हेडमास्टर के जवाब और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसमें निलंबन सहित अन्य विभागीय कार्रवाई संभव है। अब विभागीय जांच में यह स्पष्ट होगा कि प्राइवेट शिक्षिका को किसके निर्देश पर रखा गया, उसे भुगतान कौन कर रहा था और स्कूल में सरकारी शिक्षक की जगह प्राइवेट शिक्षकों से बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था कितने समय से चल रही थी।