गूगल पौधरोपण से बीहड़ों में हरियाली की पहल, पिपरई और एचवाड़ा में लगाए 830 पौधे

मुरैना। औषधीय पौधों के संरक्षण, ग्रामीणों की आजीविका को बढ़ावा देने और बीहड़ क्षेत्र में हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से सुजागृति संस्था मुरैना द्वारा डावर कंपनी के सहयोग से 19 और 20 सितंबर 2026 को पौधरोपण अभियान चलाया गया। अभियान के तहत पिपरई मुरैना में पटवारी प्रशिक्षण केंद्र के पीछे तथा सबलगढ़ क्षेत्र के एचवाड़ा में गूगल के पौधे लगाए गए।

इस दौरान पूर्व में लगाए गए पौधों की सफाई भी की गई। संस्था के अनुसार बारिश के बाद अत्यधिक घास उगने से पौधों के विकास पर असर पड़ता है और उनके सूखने का खतरा रहता है। अभियान में ग्रामीण हितग्राही किसानों और मजदूरों ने भी सक्रिय भागीदारी की।

कार्यक्रम की शुरुआत गोष्ठी से हुई, जिसमें गूगल पौधे के महत्व, उसके संरक्षण और पौधरोपण की सही विधि की जानकारी दी गई। संस्था अध्यक्ष एवं समाजसेवी जाकिर हुसैन ने कहा कि गूगल मध्यप्रदेश की महंगी लघु वनोपज में शामिल है और मुरैना की पहचान से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बीहड़ क्षेत्र में जहां जमीन के कटाव और खराब होती भूमि की समस्या है, वहीं इन्हीं क्षेत्रों में गूगल का पौधा ग्रामीणों की आजीविका के लिए वरदान साबित हो सकता है।

उन्होंने कहा कि गूगल का संरक्षण और संवर्धन गरीब ग्रामीण परिवारों की आजीविका के साथ-साथ औषधीय उपयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने एक-एक गूगल का पौधा लगाकर संरक्षण का संकल्प लिया।

अभियान के दौरान पिपरई में 225 गूगल के पौधे और एचवाड़ा में 605 पौधों का रोपण किया गया। इस तरह दोनों स्थानों पर कुल 830 पौधे लगाए गए। मजदूरों ने दिनभर पौधरोपण के साथ क्षेत्र में उपलब्ध ककोड़ों को भी एकत्र किया।

संस्था के अनुसार पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वायु को शुद्ध करने, प्रदूषण कम करने और तापमान नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चंबल अंचल की जलवायु शुष्क और अर्ध-शुष्क होने के कारण यहां हरियाली बढ़ाना पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय, जबलपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मोनी थॉमस ने बताया कि नीम और बबूल जैसी प्रजातियां भी अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कार्बन डाइऑक्साइड के संचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने क्षेत्र में अधिक से अधिक पौधरोपण और उनके संरक्षण पर जोर दिया।

अभियान का मुख्य उद्देश्य गूगल का उत्पादन बढ़ाना, विलुप्त होती पौध प्रजातियों का संरक्षण, बीहड़ कटाव को रोकना, ग्रामीणों की आजीविका को मजबूत करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।

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