मुरैना। चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन पर रोक लगाने के लिए वन विभाग ने निगरानी व्यवस्था मजबूत कर दी है। राजघाट के नजदीक रिठौरा घाट पर AI कैमरे लगाए गए हैं। अब ड्रोन और AI कैमरों की मदद से संवेदनशील घाटों पर नजर रखी जाएगी। राजस्थान के धौलपुर क्षेत्र में भी AI कैमरे लगाने की तैयारी है। इससे मध्यप्रदेश और राजस्थान की सीमा से लगे चंबल क्षेत्र में संयुक्त निगरानी को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

SP और DFO ने ड्रोन से किया निरीक्षण
पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना और डीएफओ हरीश चंद्र बघेल ने राजघाट पहुंचकर चंबल नदी और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया। इस दौरान ड्रोन कैमरे से निगरानी की गई। अधिकारियों के निरीक्षण के दौरान रेत उत्खनन से जुड़ी कोई गतिविधि दिखाई नहीं दी। मौके पर वाहनों की हलचल और टायरों के निशान भी नहीं मिले। एसपी ने राजघाट पर तैनात सुरक्षा बलों को ड्रोन के माध्यम से निगरानी करने और संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही घाटों पर गश्त बढ़ाने पर जोर दिया गया।
पहले जहां होता था उत्खनन, वहां फिलहाल शांति: एसपी
एसपी धर्मराज मीना ने बताया कि राजघाट और आसपास के क्षेत्रों का ड्रोन से अवलोकन किया गया है। जिन स्थानों पर पहले रेत उत्खनन की गतिविधियां नजर आती थीं, वहां फिलहाल शांति है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि चंबल नदी में किसी भी स्थिति में अवैध उत्खनन न हो। इसके लिए सुरक्षा बलों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और गश्त भी बढ़ाई गई है।

437 किलोमीटर क्षेत्र में संवेदनशील घाटों पर नजर
डीएफओ हरीश चंद्र बघेल ने बताया कि चंबल अभयारण्य का क्षेत्र करीब 437 किलोमीटर में फैला है। इतने बड़े क्षेत्र में लगातार निगरानी करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में सबसे संवेदनशील घाटों और अवैध उत्खनन की आशंका वाले स्थानों पर ड्रोन और AI कैमरों की मदद ली जाएगी। फिलहाल दो कैमरे लगाए गए हैं। निगरानी का दायरा बढ़ाने के लिए दो अतिरिक्त ड्रोन उपलब्ध कराने के संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। एसएएफ, वन विभाग और जिला टास्क फोर्स ने रात्रि गश्त भी बढ़ाई है।
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और एसपी धर्मराज मीना के समन्वय से संयुक्त टास्क फोर्स अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने के लिए सक्रिय है।
MP-राजस्थान की संयुक्त निगरानी से कसेगा शिकंजा
चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान के वन विभाग समन्वय के साथ निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मुरैना की ओर AI कैमरे लगाए जा चुके हैं, जबकि धौलपुर क्षेत्र में भी कैमरे लगाने की तैयारी है। ड्रोन, AI कैमरों और रात्रि गश्त के जरिए चंबल नदी के संवेदनशील घाटों के साथ नेशनल हाईवे-44 से जुड़े रास्तों पर भी निगरानी मजबूत करने की योजना है। इससे रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।