मुरैना के प्राचीन शनि मंदिर में आस्था का महाकुंभ, देशभर से दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु

मुरैना। जिले के एंती पर्वत स्थित प्राचीन शनि मंदिर में शनिश्चरी अमावस्या पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। शनिवार को भगवान शनिदेव के दर्शन के लिए मध्य प्रदेश सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह 9 बजे तक करीब 60 हजार श्रद्धालुओं के दर्शन करने की जानकारी सामने आई, जबकि देर रात तक डेढ़ से दो लाख भक्तों के पहुंचने की उम्मीद जताई गई।

आधी रात को खुले मंदिर के पट, कलेक्टर-एसपी ने की पूजा-अर्चना

शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर शुक्रवार रात से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। रात 12 बजे कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ और पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा ने मंदिर के गर्भगृह में भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना की। इसके बाद श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए।शनिवार सुबह 7 बजे से मंदिर परिसर में भीड़ तेजी से बढ़ने लगी। सुबह 9 बजे तक करीब 60 हजार श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। मंदिर के बाहर लगभग एक किलोमीटर दूर तक भक्तों की कतारें लगी रहीं। दिन चढ़ने के साथ श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार इजाफा होता रहा।

सुरक्षा के लिए पुलिस बल तैनात, 500 राजस्वकर्मी संभाल रहे व्यवस्था

मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। मंदिर परिसर से लेकर रास्ते में करीब दो किलोमीटर दूर तक पुलिस बल तैनात किया गया। डीएसपी और थाना प्रभारी स्तर के अधिकारी लगातार पेट्रोलिंग कर व्यवस्थाओं पर नजर रखते रहे।वहीं, मेले की व्यवस्था संभालने के लिए एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी और राजस्व निरीक्षक सहित करीब 500 राजस्वकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का जोर श्रद्धालुओं की सुरक्षित आवाजाही, भीड़ नियंत्रण और सुचारु दर्शन व्यवस्था बनाए रखने पर रहा।

त्रेता युग से जुड़ी है शनि मंदिर की मान्यता

मुरैना के एंती पर्वत स्थित शनि मंदिर को देश के प्रमुख प्राचीन शनि तीर्थों में गिना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां भगवान शनिदेव त्रेता युग से विराजमान हैं। पौराणिक कथा के मुताबिक, लंका पर चढ़ाई से पहले भगवान हनुमान ने शनिदेव को लंका से बाहर फेंका था, जिसके बाद शनिदेव एंती पर्वत पर आकर गिरे थे। स्थानीय मान्यता है कि भगवान शनिदेव के आशीर्वाद से मुरैना क्षेत्र में सरसों की अच्छी पैदावार होती है। इसी आस्था के चलते शनिश्चरी अमावस्या पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं।

सात पीढ़ियों से एक ही परिवार कर रहा शनिदेव की सेवा

शनि मंदिर की परंपराओं में एक विशेष पहचान पुजारी परिवार की भी है। मंदिर के पुजारी ब्रजभूषण दास के अनुसार, उनके परिवार की सात पीढ़ियां भगवान शनिदेव की पूजा-अर्चना और सेवा करती आ रही हैं। वह स्वयं अपने परिवार की सातवीं पीढ़ी के रूप में मंदिर में सेवा कर रहे हैं।

15 फीट लंबे सर्प देवता को लेकर भी मान्यता

मंदिर परिसर में 15 फीट लंबे सर्प देवता को लेकर भी विशेष धार्मिक मान्यता प्रचलित है। पुजारी ब्रजभूषण दास के अनुसार, सर्प देवता मंदिर परिसर में विचरण करते हैं और मान्यता है कि वे अपनी इच्छा से दिन में एक बार दर्शन देते हैं। श्रद्धालु इसे भगवान शनिदेव की विशेष कृपा से जोड़कर देखते हैं। पुजारी के मुताबिक, कभी-कभी सर्प की तेज फुफकार से श्रद्धालु भयभीत भी हो जाते हैं। हालांकि, सर्प से संबंधित इन बातों को स्थानीय धार्मिक मान्यता के रूप में ही देखा जाता है।

देर रात तक भारी भीड़ जुटने की उम्मीद

शनिश्चरी अमावस्या पर एंती पर्वत स्थित शनि मंदिर में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या के बीच देर रात तक भारी भीड़ जुटने की संभावना जताई गई। दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने भगवान शनिदेव के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। धार्मिक आस्था, प्राचीन परंपराओं और मेले की भव्यता के चलते एंती पर्वत एक बार फिर शनिभक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना रहा।

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