दद्दाजी का संकल्प, हर-घर महादेव… अमावस्या पर असंख्य पार्थिव शिवलिंगों से शिवमय हुआ अंबाह

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ महारुद्राभिषेक, दद्दा शिष्य परिवार ने आगे बढ़ाई ब्रह्मलीन संत दद्दाजी की परंपरा; क्वारी नदी में किया पार्थिव शिवलिंगों का विसर्जन

अंबाह (मुरैना)। अमावस्या के पावन अवसर पर अंबाह में भगवान शिव की भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। शुक्रवार को पीएचई परिसर स्थित संकट मोचन हनुमान मंदिर में दद्दा शिष्य परिवार अंबाह-बरेह एवं भक्त मंडल की ओर से पार्थिव शिवलिंग निर्माण और महारुद्राभिषेक का आयोजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण कर भगवान शिव की आराधना की। वैदिक मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया। अनुष्ठान के समापन पर पार्थिव शिवलिंगों का विधि-विधान से क्वारी नदी में विसर्जन किया गया।

आचार्य गिरजाशंकर शास्त्री के सान्निध्य में हुआ महारुद्राभिषेक

कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने मिट्टी से पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण किया। इसके बाद आचार्य गिरजाशंकर शास्त्री के सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधानपूर्वक पूजन-अर्चन और महारुद्राभिषेक संपन्न कराया गया। आयोजन में महिलाओं सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।इस धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से ब्रह्मलीन संत पंडित देव प्रभाकर शास्त्री ‘दद्दाजी’ की प्रेरणा और उनकी आध्यात्मिक परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया।

दद्दाजी की प्रेरणा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास

दद्दा शिष्य परिवार से जुड़े शिवदत्त व्यास ने बताया कि ब्रह्मलीन संत पंडित देव प्रभाकर शास्त्री ‘दद्दाजी’ का जीवन भगवान शिव की भक्ति, सेवा और संस्कारों के लिए समर्पित रहा। उन्होंने ‘हर-घर महादेव’ की प्रेरणा देकर शिवभक्ति को मंदिरों तक सीमित न रखते हुए प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने का संदेश दिया था।उन्होंने कहा कि दद्दाजी के शिष्य और भक्त उनके इसी संकल्प को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रत्येक अमावस्या पर पार्थिव शिवलिंग निर्माण और पूजन का आयोजन इसी परंपरा की निरंतरता है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक परिवारों को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और शिवभक्ति से जोड़ना तथा दद्दाजी की आध्यात्मिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।गृहस्थ संत डॉ. अनिल शास्त्री के मार्गदर्शन में आयोजित यह अनुष्ठान गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनकी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।

पूजा-अर्चना के साथ संस्कारों का संदेश

आचार्य गिरजाशंकर शास्त्री ने कहा कि अमावस्या पर पार्थिव शिवलिंग का निर्माण और पूजन भगवान शिव की आराधना का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किए जाने वाले ऐसे धार्मिक अनुष्ठान लोगों को आध्यात्मिक चेतना से जोड़ने के साथ ही भारतीय संस्कृति, परंपराओं और संस्कारों के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं।आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना की। पूरे कार्यक्रम में भक्ति और आध्यात्मिकता का वातावरण बना रहा।

हर अमावस्या पर दोहराया जा रहा ‘हर-घर महादेव’ का संकल्प

दद्दाजी की प्रेरणा से दद्दा शिष्य परिवार द्वारा अंबाह-बरेह क्षेत्र में ‘हर-घर महादेव’ अभियान के तहत नियमित रूप से धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। प्रत्येक अमावस्या पर श्रद्धालु एकत्रित होकर पार्थिव शिवलिंगों का निर्माण करते हैं और भगवान शिव का पूजन-अभिषेक करते हैं। आयोजकों के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से समाज को एक सूत्र में जोड़ना, पारिवारिक संस्कारों को मजबूत करना और गुरु की प्रेरणा को जीवंत बनाए रखना है। यह आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से परिचित कराने का प्रयास भी है।

कार्यक्रम में शिवदत्त व्यास, महावीर शर्मा, सुनील मिश्रा, लाखन शर्मा, रमेश उपाध्याय, आचार्य गिरजाशंकर शास्त्री, रोहित, राहुल, अमन, दीपक, योगेश, शिवा, आकाश सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और महिला भक्त उपस्थित रहीं।

हर-हर महादेव के जयघोष के साथ संपन्न हुए इस आयोजन ने अंबाह में शिवभक्ति, गुरु परंपरा और भारतीय संस्कृति के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था को अभिव्यक्त किया।

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