मुरैना। वर्षायोग के लिए नगर प्रवेश के बाद बड़े जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में जैन संत आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने कहा कि इंसानियत के बिना धर्म अधूरा है। उन्होंने कहा कि धर्म केवल पूजा-पाठ, जप, तप और अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका वास्तविक स्वरूप व्यक्ति के व्यवहार, विचार और चरित्र में दिखाई देना चाहिए।आचार्यश्री ने कहा कि यदि जीवन में करुणा, दया, परोपकार और विनम्रता का अभाव है, तो बाहरी धार्मिक आडंबर आत्मकल्याण का माध्यम नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि सच्चा धार्मिक वही है, जिसके हृदय में प्रत्येक प्राणी के प्रति प्रेम, संवेदना और सेवा का भाव हो। दूसरों के दुःख को अपना दुःख समझना तथा स्वार्थ के स्थान पर परमार्थ को अपनाना ही धर्म का सार है।उन्होंने कहा कि चाहे कितने भी चातुर्मास कर लिए जाएं, यदि मन की मलिनता दूर नहीं हुई तो उनका वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा। पूजा के बाद भी यदि व्यवहार कठोर रहे और वाणी से किसी का हृदय आहत हो, तो व्यक्ति को अपने धर्माचरण का आत्ममंथन करना चाहिए।

समाजहित को सर्वोपरि रखने का आह्वान
आचार्यश्री उदारसागरजी ने कहा कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता होती है। प्रेम, विश्वास, सहयोग और सद्भाव समाज को आगे बढ़ाते हैं, जबकि अहंकार, ईर्ष्या, गुटबाजी और मनमानी उसे कमजोर कर देती है। उन्होंने कहा कि संस्थाओं के पदाधिकारियों को समाज के प्रत्येक व्यक्ति से सम्मानपूर्वक व्यवहार करना चाहिए और संगठन को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखना चाहिए।उन्होंने कहा कि मतभेद विचारों में हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिए। जब समाज एक परिवार की तरह कार्य करेगा, तभी वह संगठित, सशक्त और संस्कारित बन सकेगा।

संत-सानिध्य से जीवन को मिलती है नई दिशा
मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज ने कहा कि दिगम्बर साधु-संतों का सानिध्य दुर्लभ सौभाग्य है। उनका त्याग, तप, संयम और वैराग्य आत्मकल्याण एवं लोकमंगल के लिए समर्पित होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से संतों के दर्शन, प्रवचन और वैयावृत्ति का लाभ लेने तथा उनके उपदेशों को जीवन में उतारने का आग्रह किया।

भव्य शोभायात्रा के साथ हुआ नगर प्रवेश
शनिवार, 25 जुलाई को आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने अपने शिष्य मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज, ऐलकश्री उत्साहसागरजी महाराज एवं क्षुल्लकश्री उपकारसागरजी के साथ भव्य शोभायात्रा के माध्यम से मुरैना नगर में प्रवेश किया।बड़ा जैन मंदिर समिति एवं वर्षायोग समिति के नेतृत्व में समाजजनों ने वैरियर पर पादप्रक्षालन, आरती और श्रीफल भेंट कर आचार्य संघ का स्वागत किया। वैरियर चौराहे से निकली शोभायात्रा एम.एस. रोड, नेहरू पार्क, पुल तिराहा, सदर बाजार, हनुमान चौराहा, सराफा बाजार और लोहिया बाजार होते हुए बड़े जैन मंदिर पहुंची, जहां धर्मसभा का आयोजन किया गया।शोभायात्रा में जैन संस्कृत विद्यालय के छात्र पंचरंगी ध्वज लेकर चल रहे थे। पुरुष वर्ग जिनेन्द्र प्रभु का गुणगान कर रहा था, जबकि महिलाओं ने भक्तिमय भजनों से पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर आचार्य संघ का स्वागत एवं आरती की गई।
