23 साल बाद गरीबों को मिला जमीन का हक, 41 बीघा भूमि अवैध कब्जे से मुक्त

मुरैना/ अंबाह तहसील के ग्राम लुधावली में शुक्रवार का दिन कई गरीब परिवारों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं रहा। वर्ष 2003 में आजीविका के लिए शासन से मिले भूमि पट्टों पर 23 वर्षों तक अधिकार पाने का इंतजार कर रहे परिवारों को आखिरकार अपनी जमीन का कब्जा मिल गया। जैसे ही राजस्व विभाग ने सीमांकन कर भूमि का कब्जा सौंपा, वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठे लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी।

कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देश पर एसडीएम प्रतिज्ञा शर्मा के नेतृत्व में तहसीलदार नरेश शर्मा एवं राजस्व विभाग की टीम ने ग्राम लुधावली के सर्वे क्रमांक 302 और 306 का सीमांकन किया। इसके बाद 41 बीघा से अधिक सरकारी पट्टा भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर वास्तविक पट्टाधारियों और उनके वैधानिक उत्तराधिकारियों को विधिवत कब्जा सौंप दिया। इस भूमि की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ रुपये बताई गई है।

23 साल बाद मिला अपनी जमीन पर अधिकार

शासन ने वर्ष 2003 में गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को आजीविका के लिए भूमि पट्टे आवंटित किए थे, लेकिन अवैध कब्जों के कारण वे वर्षों तक अपनी ही जमीन पर खेती नहीं कर सके। कई मूल पट्टाधारियों का इस दौरान निधन हो गया। ऐसे में प्रशासन ने सीमांकन कर उनके वैधानिक वारिसों को भी भूमि का कब्जा सौंपा। कई परिवारों ने पहली बार अपनी पुश्तैनी अधिकार वाली जमीन पर कदम रखा।ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला था। अब जमीन मिलने से वे खेती कर सकेंगे और अपने परिवार की आजीविका को मजबूत बना पाएंगे।

पहले भी हुई थी कार्रवाई

इससे पहले 23 जुलाई 2026 को भी तहसीलदार नरेश शर्मा के नेतृत्व में इसी गांव के 14 पट्टाधारियों को सीमांकन कर उनकी भूमि का कब्जा दिलाया गया था। प्रशासन लगातार अभियान चलाकर गरीब परिवारों को उनकी जमीन वापस दिला रहा है।

इन हितग्राहियों को मिला लाभ

इस कार्रवाई में कदुमी, कैलाशी, ओमप्रकाश, आशाराम, रामबरन, करूआ, इतवारी, मुन्नालाल सिंह, रामसेवक, बंटी और मुकेश सहित ग्राम लुधावली के पात्र पट्टाधारियों एवं उनके वैधानिक वारिसों को भूमि का कब्जा दिया गया।

प्रशासन की प्राथमिकता

तहसीलदार नरेश शर्मा ने बताया कि अंबाह तहसील में गरीब एवं असहाय लोगों की जमीन से अवैध कब्जे हटाकर उन्हें उनका अधिकार दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में अभियान आगे भी जारी रहेगा।उल्लेखनीय है कि 23 जुलाई और 31 जुलाई को हुई दोनों कार्रवाइयों में प्रशासन ने करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी पट्टा भूमि उसके वास्तविक हकदारों को वापस दिलाई है।

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