30 अगस्त तक जिले की सभी 186 नल-जल योजनाएं पूरी क्षमता से हों संचालित: कलेक्टर लोकेश जांगिड़

घर-घर जलापूर्ति का होगा सत्यापन, अंतिम छोर तक निर्बाध पेयजल पहुंचाने के दिए निर्देश

मुरैना जिले के प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ और निर्बाध पेयजल पहुंचाने के उद्देश्य से कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने पंचायतों को हस्तांतरित सभी 186 नल-जल योजनाओं को 30 अगस्त तक पूरी क्षमता से संचालित करने के निर्देश दिए हैं।बुधवार को पीएचई विभाग की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि पाइपलाइन लीकेज, मोटर, बिजली आपूर्ति और अन्य तकनीकी कमियों को तत्काल दूर कर हर गांव के अंतिम छोर तक नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए। जिन योजनाओं की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि समाप्त नहीं हुई है, उन्हें संबंधित ठेकेदारों के माध्यम से जल्द चालू कराया जाए।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल कागजी प्रगति पर्याप्त नहीं होगी। अधिकारी स्वयं गांवों में जाकर घर-घर नलों की टोंटी खोलकर जलापूर्ति का सत्यापन करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों तक नियमित पेयजल पहुंचे।

कलेक्टर ने नल-जल योजनाओं के रखरखाव और आवश्यक सामग्री की खरीद ई-टेंडर (ईआरईएस) प्रक्रिया के माध्यम से समय-सीमा में पूरी करने तथा ग्राम पंचायतों की भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पीएचई विभाग और जनपद पंचायत की संयुक्त जांच के बाद ही योजनाओं का हस्तांतरण स्वीकार किया जाए।

बैठक में बिजली विभाग को निर्देश दिए गए कि किसी भी नल-जल योजना का बिजली कनेक्शन न काटा जाए और सभी योजनाओं को नियमित तीन-फेज बिजली उपलब्ध कराई जाए। किसी भी तकनीकी या विद्युत समस्या का पीएचई, जनपद पंचायत और बिजली विभाग आपसी समन्वय से तत्काल समाधान करें।

जल गुणवत्ता बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने पंचायत सचिवों को प्रशिक्षण के बाद फील्ड टेस्ट किट (एफटीके) वितरित करने के निर्देश दिए, ताकि गांव स्तर पर समय-समय पर पानी की गुणवत्ता की जांच की जा सके। बैठक में बताया गया कि अंबाह में 24, पोरसा में 18, मुरैना में 49, जौरा में 36, सबलगढ़ में 20, कैलारस में 18 और पहाड़गढ़ में 21 नल-जल योजनाएं पंचायतों को हस्तांतरित की जा चुकी हैं। कलेक्टर ने इन सभी योजनाओं का संयुक्त सर्वे कर नियमित एवं सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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