फर्जी हस्ताक्षर विवाद पर हंगामा, बैठक स्थगित, 11 अगस्त को होगा शक्ति परीक्षण
मुरैना। नगर निगम परिषद की बैठक शुक्रवार को भारी हंगामे की भेंट चढ़ गई। महापौर शारदा सोलंकी की अनुपस्थिति में शुरू हुई बैठक सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक के चलते कुछ ही देर में स्थगित करनी पड़ी। बैठक के दौरान “महापौर मुर्दाबाद”, “भ्रष्टाचार बंद करो” और “चंदा चोर” जैसे नारों से सदन गूंजता रहा। इसी बीच नेता प्रतिपक्ष द्वारा अभियाचित सम्मेलन बुलाने के लिए दिए गए आवेदन में कथित फर्जी हस्ताक्षरों का विवाद भी सामने आ गया, जिसने नगर निगम की राजनीति को और गरमा दिया।

दरअसल, 22 जुलाई को नेता प्रतिपक्ष विनीत कंसाना ने महापौर के खिलाफ विभिन्न आरोप लगाते हुए सभापति को अभियाचित सम्मेलन बुलाने के लिए आवेदन दिया था। आवेदन में कांग्रेस पार्षदों के साथ भाजपा के चार पार्षदों के हस्ताक्षर भी दर्शाए गए थे। इसके बाद नगर निगम की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी।

शुक्रवार को हुई परिषद की बैठक के दौरान इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। भाजपा पार्षद शशी कुशवाहा, प्रेमवती और हरिओम राठौर ने सभापति को शिकायत देकर दावा किया कि आवेदन में किए गए हस्ताक्षर उनके नहीं हैं और उन्हें फर्जी तरीके से दर्शाया गया है। पार्षदों ने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

वहीं नेता प्रतिपक्ष विनीत कंसाना ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि हस्ताक्षर उनके नहीं हैं तो संबंधित पार्षद गंगाजल उठाकर इसकी कसम खाएं या फिर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं। उन्होंने दावा किया कि आवेदन पर हस्ताक्षर उन्हीं पार्षदों के हैं और अब वे अपने बयान से पीछे हट रहे हैं।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहस होती रही। सूत्रों के अनुसार, भाजपा पार्षदों के बदले रुख के पीछे पार्टी स्तर पर हुई सख्ती और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई की आशंका को भी वजह माना जा रहा है।

महापौर शारदा सोलंकी की अनुपस्थिति के कारण परिषद की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी और बैठक को स्थगित कर दिया गया। सभापति ने अब अभियाचित सम्मेलन के आयोजन के लिए 11 अगस्त की नई तारीख तय की है।

इन सात मुद्दों पर होनी थी चर्चा
बैठक में सात महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा प्रस्तावित थी—
राजस्व शाखा की कार्यप्रणाली, शहर की स्वच्छता व्यवस्था, निर्माण शाखा के कार्यों की समीक्षा, सीवर प्रोजेक्ट की प्रगति, निकाय के दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को 10 वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर नियमित करने का प्रस्ताव, परिषद की अनुमति के बिना आयोजित महापौर टूर्नामेंट एवं उसमें कथित अनियमितताओं की जांच, वर्तमान परिषद द्वारा प्रस्तावित विकास कार्यों के भुगतान पर चर्चा, लेकिन भारी हंगामे के कारण किसी भी एजेंडे पर चर्चा नहीं हो सकी और बैठक बिना किसी निर्णय के स्थगित कर दी गई। अब 11 अगस्त को होने वाले अभियाचित सम्मेलन और इस पूरे विवाद पर सभी की नजरें टिकी हैं। नगर निगम की राजनीति में फर्जी हस्ताक्षर का मामला और भाजपा पार्षदों के बदले रुख ने नए सियासी सवाल खड़े कर दिए हैं।