गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को: मुरैना में सजी गणेश प्रतिमाओं की दुकानें, जानें घर के लिए कैसी मूर्ति शुभ

मुरैना। भगवान गणेश के प्रकट उत्सव के रूप में मनाई जाने वाली गणेश चतुर्थी इस बार 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। गणेश उत्सव को लेकर मुरैना शहर में भी तैयारियां शुरू हो गई हैं। शहर के प्रमुख स्थानों पर भगवान गणेश की आकर्षक प्रतिमाओं की दुकानें सज गई हैं, जहां अलग-अलग आकार और डिजाइन की गणेश प्रतिमाएं लोगों को आकर्षित कर रही हैं।

मुरैना शहर में चंबल कॉलोनी गेट के पास एमएस रोड, शहीद संग्रहालय के बाहर, हनुमान चौराहा सदर बाजार और बड़ोखर-नंदेपुरा रोड पर गणेश प्रतिमाओं की दुकानें लगी हैं। यहां छोटी प्रतिमाओं से लेकर बड़े आकार की आकर्षक और मनमोहक गणेश प्रतिमाएं उपलब्ध हैं। गणेश चतुर्थी नजदीक आने के साथ ही लोग अपने घरों और सार्वजनिक पंडालों के लिए प्रतिमाओं की खरीदारी करने पहुंच रहे हैं।

14 सितंबर से शुरू होगा गणेश उत्सव

भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर की सुबह करीब 7:06 बजे शुरू होकर 15 सितंबर की सुबह करीब 7:44 बजे तक रहेगी। अलग-अलग पंचांगों और स्थान के अनुसार समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है। इस बार खास बात यह है कि हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व 14 सितंबर को ही मनाए जाएंगे।

गणेश चतुर्थी का उत्सव 25 सितंबर तक चलेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश बुद्धि, विवेक, सुख-समृद्धि और विघ्नों को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। इसी वजह से गणेश चतुर्थी पर घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति की स्थापना कर विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।

सोमवार को गणेश चतुर्थी होने से विशेष संयोग

इस बार गणेश चतुर्थी सोमवार को पड़ रही है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, जबकि चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश माने जाते हैं। ऐसे में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान गणेश के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का भी विशेष महत्व माना जा रहा है।

भक्त इस दिन शिव परिवार यानी भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। शिवलिंग पर चंदन अर्पित करने, माता पार्वती को लाल चुनरी, चूड़ियां, कुमकुम और अन्य सुहाग सामग्री चढ़ाने की परंपरा है।

घर में गणेश जी की स्थापना करते समय इन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक जानकार बताते हैं कि घर के मंदिर में भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। बैठी हुई मुद्रा में गणेश जी की प्रतिमा को घर के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह मुद्रा सुख, शांति और स्थिरता का प्रतीक मानी जाती है।

घर की सामान्य पूजा के लिए बाईं ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा को प्राथमिकता देने की परंपरा है। वहीं दाईं ओर सूंड वाले गणपति को भी विशेष माना जाता है, लेकिन उनकी पूजा के नियम अलग माने जाते हैं।

गणेश जी की प्रतिमा का स्वरूप प्रसन्न और शांत होना शुभ माना जाता है। मूर्ति बहुत बड़ी हो, यह जरूरी नहीं है। घर के मंदिर के आकार के अनुसार छोटी और साफ-सुथरी प्रतिमा रखी जा सकती है। प्रतिमा खरीदते समय यह भी देखना चाहिए कि वह कहीं से टूटी या खंडित न हो।

गणेश जी को क्या चढ़ाएं?

गणेश पूजा में हरी और ताजी दूर्वा चढ़ाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा लाल फूल, विशेषकर गुड़हल, लाल चंदन, सिंदूर और लाल या पीले वस्त्र अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा में शमी के पत्ते भी चढ़ाने की परंपरा है।

भगवान गणेश को भोग में मोदक, लड्डू, फल, नारियल और अन्य मिठाइयां अर्पित की जा सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश पूजा में तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता।

ऐसे करें घर में गणपति की पूजा

गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर पूजा स्थल को स्वच्छ करें। पूजा की चौकी पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाकर गणेश प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान गणेश का आवाहन करें और परिवार की सुख-शांति, आरोग्य, बुद्धि एवं समृद्धि की कामना करते हुए पूजा का संकल्प लें।

पूजा में सिंदूर, हल्दी, कुमकुम, अक्षत, चंदन, फूल, दूर्वा, धूप, दीप, फल और मोदक अर्पित करें। घर में सकारात्मक वातावरण के लिए गणेश मंत्र, गणेश अथर्वशीर्ष, गणेश स्तुति और आरती का पाठ किया जा सकता है। पूजा के साथ जरूरतमंद लोगों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, भोजन, जूते-चप्पल या धन का दान भी किया जा सकता है।

धार्मिक मान्यताओं पर आधारित जानकारी

यह खबर गणेश चतुर्थी से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। पूजा की विधि और शुभ समय में स्थानीय पंचांग तथा पारिवारिक परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है।

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