रिटायर्ड एएसआई के शव को लेकर दो परिवारों में खींचतान, पुलिस की मौजूदगी में सुलझा मामला

मुरैना। जिला अस्पताल मुरैना के शव गृह में शनिवार को एक भावुक और विवादपूर्ण स्थिति उस समय निर्मित हो गई, जब रिटायर्ड एएसआई आशाराम जाटव के अंतिम संस्कार को लेकर उनके परिवार के दो पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद के चलते शव गृह परिसर में कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया।जानकारी के अनुसार, गोपालपुरा की पीपल वाली गली निवासी 57 वर्षीय आशाराम जाटव का हृदयाघात (हार्ट अटैक) से निधन हो गया था। पोस्टमार्टम के दौरान उनकी पहली पत्नी महादेवी और पुत्र शिवराज जिला अस्पताल पहुंचे तथा शव को पैतृक गांव खेरिया, पोरसा ले जाकर अंतिम संस्कार करने की इच्छा जताई।वहीं दूसरी पत्नी मुन्नी देवी के पुत्र शैलेन्द्र और हेमंत ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि आशाराम जाटव पिछले 33 वर्षों से उनके साथ रह रहे थे और बीमारी से लेकर वृद्धावस्था तक उनकी देखभाल उन्होंने ही की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहली पत्नी और पुत्र लंबे समय से उनसे दूर थे और अब अंतिम संस्कार के अधिकार को लेकर सामने आए हैं।

दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ने पर शव गृह परिसर में विवाद की स्थिति बन गई। सूचना मिलने पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों के साथ-साथ स्थानीय लोगों की मदद से दोनों पक्षों को समझाइश दी। काफी देर चली चर्चा और समझौते के प्रयासों के बाद मामला शांत हुआ। इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने पर शव दूसरी पत्नी के बेटों को सौंप दिया गया, जिन्होंने अंतिम संस्कार की आगे की व्यवस्थाएं संभालीं। इस घटना ने पारिवारिक रिश्तों और अंतिम संस्कार के अधिकार को लेकर उत्पन्न होने वाले संवेदनशील विवादों को एक बार फिर सामने ला दिया।

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