मुरैना। अंबाह गेम रेंज के अंतर्गत ग्राम पंचायत डोडरी में वन विभाग की कथित लापरवाही के चलते राष्ट्रीय पक्षी मोर की मौत का मामला सामने आया है।

करंट की चपेट में आने से घायल हुए मोर को बचाने के लिए ग्रामीणों ने हरसंभव प्रयास किए और तत्काल वन विभाग को सूचना दी, लेकिन विभाग की टीम समय पर मौके पर नहीं पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग के कर्मचारी समय रहते पहुंचकर उपचार की व्यवस्था करते तो राष्ट्रीय पक्षी की जान बचाई जा सकती थी। जानकारी के अनुसार गांव के शासकीय स्कूल के पास एक मोर करंट लगने से गंभीर रूप से घायल हो गया था। गांव के आकाश तोमर ने अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर घायल मोर को बचाने का बहुत प्रयास किया और वन विभाग के अधिकारियों को इसकी लगातार सूचना दी।
इसके बावजूद विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची। आकाश तोमर का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी वन अमले ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिसके चलते राष्ट्रीय पक्षी मोर करीब तीन घंटे तक तड़पता रहा और आखिरकार उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों ने मोर के शव को सुरक्षित रख लिया और लगातार वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करते रहे। घटना के करीब 12 घंटे बाद अगले दिन सुबह वन विभाग की टीम गांव पहुंची। टीम को देखकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

मौके पर ग्रामीणों ने वन विभाग के कर्मचारियों से एक पंचनामा भी बनवाया उसके बाद राष्ट्रीय पक्षी मोर को उनके सुपुर्द किया गया।वन विभाग की टीम बाद में मोर के शव को पोरसा पशु चिकित्सालय लेकर पहुंची, जहां पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम के बाद नियमानुसार शव के निस्तारण की कार्रवाई की गई। ग्रामीण आकाश तोमर ने कहा कि यदि वन विभाग समय पर पहुंचकर घायल मोर का उपचार कराता तो राष्ट्रीय पक्षी की जान बच सकती थी। उन्होंने लापरवाही के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

वही मामला वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक स्तर पर संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।