मुरैना। शहर में पुलिस परेड ग्राउंड के बाद चौराहे पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित करने के लिए बनाई गई रोटरी को अब नगर निगम द्वारा तोड़ने का काम शुरू कर दिया गया है। रोटरी की ऊंचाई को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं कि जब इसे छोटा ही करना था, तो पहले इसे इतना ऊंचा बनाने की जरूरत क्यों पड़ी?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चौराहे पर बनाई गई रोटरी की ऊंचाई अधिक होने के कारण वाहन चालकों को सामने से आने-जाने वाले वाहन दिखाई नहीं देते थे। इससे यातायात में परेशानी और दुर्घटनाओं की आशंका बनी हुई थी। इसी वजह से अब रोटरी को तोड़कर इसकी ऊंचाई जमीन से करीब 3 फुट तक रखने की तैयारी की जा रही है।
इस पूरे मामले ने नगर निगम के निर्माण कार्यों की योजना और निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि निर्माण से पहले यातायात की स्थिति और वाहन चालकों की दृश्यता का आकलन किया गया होता, तो शायद सरकारी राशि खर्च करने के बाद दोबारा तोड़फोड़ की नौबत नहीं आती।
अब सवाल यह है कि निर्माण से पहले इसकी ऊंचाई और डिजाइन का सही आकलन क्यों नहीं किया गया? क्या निर्माण कार्य शुरू करने से पहले यातायात संबंधी तकनीकी पहलुओं की जांच की गई थी? और यदि रोटरी को तोड़कर दोबारा छोटा करना जरूरी था, तो इस पर पहले खर्च की गई राशि की जिम्मेदारी कौन लेगा?
फिलहाल, रोटरी को तोड़ने का काम शुरू होने के बाद नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि नगर निगम इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और निर्माण व तोड़फोड़ पर हुए खर्च को लेकर क्या जानकारी सामने आती है।