मुरैना। राधा अष्टमी के पावन पर्व पर मुरैना से करीब 30 किलोमीटर दूर ऐंती पर्वत स्थित प्राचीन बांके बिहारी मंदिर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। मंदिर परिसर में भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की रासलीला ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। भक्ति गीतों, जयकारों और धार्मिक आयोजनों से पूरा ऐंती पर्वत कृष्णमय नजर आया। राधा अष्टमी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे और भगवान बांके बिहारी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

पटिया वाले बाबा की तपोभूमि है ऐंती पर्वत
ऐंती पर्वत स्थित यह धार्मिक स्थल जयराम दास बाबा, जिन्हें श्रद्धालु पटिया वाले बाबा के नाम से भी जानते हैं, की तपोभूमि माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार बाबा जयराम दास ने इसी स्थान पर पटिया पर बैठकर वर्षों तक तपस्या की थी। इसी कारण ऐंती पर्वत आज भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बना हुआ है।
पटिया वाले बाबा और सूफी संत गफ्फूर बाबा की भेंट की मान्यता
ऐंती पर्वत से जुड़ी एक और धार्मिक मान्यता भी विशेष है। बताया जाता है कि इसी स्थान पर बाबा जयराम दास और ग्वालियर के सूफी संत गफ्फूर बाबा की पहली बार भेंट हुई थी। स्थानीय श्रद्धालु इस स्थल को संत परंपरा और आध्यात्मिक साधना से जुड़े महत्वपूर्ण स्थान के रूप में देखते हैं।

भगवान श्रीकृष्ण के आगमन की भी मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण सबसे पहले इसी स्थान पर आए थे। इसी धार्मिक आस्था के चलते मुरैना में आयोजित होने वाले प्रसिद्ध लीला मेले से पहले ऐंती पर्वत स्थित बांके बिहारी मंदिर परिसर में भी विशेष धार्मिक आयोजन और मेला आयोजित किया जाता है।
सिंधिया राजवंश से जुड़ा है मंदिर का इतिहास
बांके बिहारी मंदिर के इतिहास को लेकर यह मान्यता भी प्रचलित है कि बाबा जयराम दास ने तत्कालीन महाराज जीवाजी राव सिंधिया को पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था। वंश वृद्धि की खुशी में सिंधिया राजवंश द्वारा यहां बांके बिहारी मंदिर की स्थापना कराए जाने की बात स्थानीय परंपराओं में कही जाती है।
पटिया पर मत्था टेकने से पूरी होने की मान्यता
मंदिर परिसर में स्थित बाबा जयराम दास की पटिया को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था है। मान्यता है कि यहां श्रद्धा के साथ मत्था टेककर मनोकामना मांगने से बाबा भक्तों की मुराद पूरी करते हैं। राधा अष्टमी के अवसर पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पटिया पर मत्था टेककर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि की कामना की।

कृष्ण-गोपियों की रासलीला बनी आकर्षण का केंद्र
राधा अष्टमी के अवसर पर बांके बिहारी मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण और गोपियों की रासलीला का विशेष आयोजन किया गया। रासलीला के दौरान श्रद्धालु कृष्ण भक्ति में डूबे नजर आए। मंदिर परिसर में भक्ति संगीत और धार्मिक जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।

ऐंती पर्वत पर राधा अष्टमी का यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ-साथ मुरैना की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपरा की भी झलक प्रस्तुत करता है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने भी आयोजन में भाग लेकर भगवान बांके बिहारी के दर्शन किए।