पोरसा। शासकीय अस्पताल पोरसा में मरीजों को दवा वितरण व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। बुखार की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची एक युवती को डिस्पेंसरी से ऐसी दवा दे दी गई, जिसकी एक्सपायरी डेट जनवरी 2026 थी। गनीमत रही कि युवती ने दवा खाने से पहले पैकेट पर दर्ज एक्सपायरी डेट देख ली और उसका सेवन करने से बच गई।
बुखार की शिकायत पर अस्पताल पहुंची थी युवती
पोरसा निवासी काजल तोमर बुखार की समस्या के चलते शासकीय अस्पताल पहुंचीं। डॉक्टर से जांच कराने के बाद उन्हें दवाएं लिखी गईं और अस्पताल की डिस्पेंसरी से दवा लेने के लिए कहा गया। काजल ने डिस्पेंसरी से दवाएं लीं और घर लौट गईं। घर पहुंचने के बाद जब वह दवा लेने लगीं तो उन्होंने टैबलेट के पैकेट पर दर्ज जानकारी देखी। पैकेट पर एक्सपायरी डेट जनवरी 2026 लिखी थी। यह देखकर काजल हैरान रह गईं कि अस्पताल की डिस्पेंसरी से उन्हें ऐसी दवा दी गई, जिसकी मियाद पहले ही समाप्त हो चुकी थी।

शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचीं, सुनवाई नहीं होने का आरोप
एक्सपायरी दवा मिलने के बाद काजल तत्काल दोबारा शासकीय अस्पताल पहुंचीं और मामले की शिकायत की। उनका आरोप है कि उन्होंने अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी दी, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई प्रभावी कार्रवाई या सुनवाई नहीं हुई।

BMO ने फोन रिसीव नहीं किया
मामले को लेकर पोरसा अस्पताल के BMO डॉ. शैलेंद्र तोमर से जानकारी लेने के लिए फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। ऐसे में अस्पताल की डिस्पेंसरी में एक्सपायरी दवा पहुंचने और मरीज को दिए जाने को लेकर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने नहीं आ सका।
CMHO बोले- मामला गंभीर, जांच कराएंगे
मामले में CMHO डॉ. पद्मेश उपाध्याय ने कहा कि उनकी जानकारी में अभी यह मामला नहीं आया है। उन्होंने कहा, “यदि ऐसा हुआ है तो यह गंभीर मामला है। मैं मामले को दिखवाता हूं और इसकी जांच करवाएंगे।

दवा स्टॉक और वितरण व्यवस्था पर उठे सवाल
सरकारी अस्पतालों में मरीजों को निशुल्क दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में एक्सपायरी डेट निकल चुकी दवा का डिस्पेंसरी से मरीज तक पहुंचना अस्पताल की दवा स्टॉक की निगरानी और वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि युवती ने दवा खाने से पहले पैकेट की एक्सपायरी डेट नहीं देखी होती तो क्या होता? अब जरूरत इस बात की है कि अस्पताल में उपलब्ध दवाओं के पूरे स्टॉक की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि एक्सपायरी दवा मरीज तक कैसे पहुंची।